विभिन्न बिंदुओं पर उच्चस्तरीय सघन जांच होने से बड़े पैमाने पर अस्पताल में व्याप्त गंभीर अनियमितताओं, भ्रष्टाचार का हो सकता है खुलासा
कर्नलगंज, गोंडा। तहसील मुख्यालय स्थित सीएचसी कर्नलगंज परिसर में ही जीवन रक्षक दवाएं,सीरप,इंजेक्शन जला दी गईं। दवाओं के जलाए जाने का वीडियो वायरल होने पर हड़कंप मच गया। सीएचसी परिसर में भारी मात्रा में यह दवाएं जलाए जाने का मामला सामने आने से सीएचसी प्रशासन को गंभीर सवालिया कठघरे में खड़ा कर दिया है। वहीं स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा दवा जलाने का प्रकरण क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।

विदित हो कि गरीबों के इलाज के लिए शासन की ओर से प्रति वर्ष लाखों रुपयों की दवाएं सरकारी अस्पतालों पर आती हैं। वहीं आए दिन सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों पर बाहर से दवा लिखने और जांच कराने के आरोप लगते रहते हैं। इसी बीच सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कर्नलगंज के परिसर में गरीबों को निःशुल्क दी जाने वाली भारी मात्रा में जीवन रक्षक दवाओं को ढेर के रूप में जलाकर राख के ढेर में तब्दील कर दिया गया।जलकर ढेर में तब्दील दवाओं का वीडियो गुरुवार की देर शाम से वायरल होने लगा। वीडियो वायरल होते ही स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मचा गया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि अस्पताल में जीवन रक्षक यह दवाएं,सीरप, इंजेक्शन क्यों जलाई गईं। क्या कमीशन के फेर में मरीजों को अस्पताल से देने के बजाए बाहर से दवाएं लिखी जाती हैं जो इतनी मात्रा में सरकारी दवाएं बच गईं।
या अगर यह दवाएं एक्सपायर थीं तो भी उन्हें परिसर के भीतर कैसे जला दिया गया। जबकि प्रोटोकॉल के मुताबिक कोई भी दवा खराब या एक्सपायर हो जाने के बाद दवा कंपनी को इस संबंध में सूचित किया जाता है। दवाएं जलाई नहीं जातीं बल्कि उन्हें आबादी से दूर जमीन में दबा देने का प्रावधान है। क्योंकि इन्हें जलने से खतरनाक रासायनिक तत्व लोगों की सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। उपरोक्त घटनाक्रम के संबंध में विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक गुरुवार 16 दिसंबर 2021 को सीएचसी संबंधित एक गंभीर शिकायत के क्रम में निरीक्षण होने की पूर्व सूचना स्थानीय अस्पताल प्रशासन को हो जाने से कहीं अस्पताल में व्याप्त अन्य अनेकों घोर अनियमितता और कारनामों पर पर्दा डालने हेतु किये गये हरसंभव प्रयासों में कुछ चूक हो जाने से यह कारनामा किसी जागरूक नागरिक या निष्पक्ष पत्रकार के नजर में आ जाने से कैमरे में कैद होकर वीडियो वायरल हो गया है जो अस्पताल प्रशासन के भ्रष्ट कारनामों को उजागर कर रहा है। हालांकि निरीक्षण करने आये सीएमओ एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक गोंडा का भी निरीक्षण महज खानापूर्ति तक सीमित रहा और शायद विभागीय लोगों पर कृपादृष्टि होने से उनकी नजर अस्पताल के काले कारनामों पर नहीं पड़ी। जबकि लोगों के अनुसार यदि गहनता से उच्चाधिकारियों द्वारा जांच और समय समय पर औचक निरीक्षण किया जाय तो बड़े पैमाने पर अस्पताल में व्याप्त विभिन्न कारनामों, नागरिकों के शोषण, अवैध वसूली और अस्पताल में खराब एवं धूल फांक रहे चिकित्सा उपकरण और अस्पताल के सामने मंडी की तरह सजी दवा की दुकानों से अस्पताल प्रशासन के कारनामों की खुद बखुद गवाही से गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है। स्थानीय लोगों ने डीएम से सम्पूर्ण प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराकर दोषी स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों, कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

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